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कानपुर का गंगा मेला: 1942 की वह परंपरा जो अंग्रेजों द्वारा होली रोकने पर शुरू हुई, आज भी जीवंत है.
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अंग्रेजों ने रोकी होली तो शुरू हुआ कानपुर का गंगा मेला: 1942 की परंपरा आज भी जीवित है.
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News18
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08-03-2026, 09:07
अंग्रेजों ने रोकी होली तो शुरू हुआ कानपुर का गंगा मेला: 1942 की परंपरा आज भी जीवित है.
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कानपुर में होली का रंग कई दिनों तक चलता है, गंगा मेला शहर की दूसरी होली कहलाता है.
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यह परंपरा 1942 में ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई जब ब्रिटिश डीएम मिस्टर लुईस ने होली खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया था.
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प्रतिबंध के बावजूद होली खेलने पर हटिया बाजार के युवाओं को गिरफ्तार किया गया, जिससे शहर में तनाव फैल गया.
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जनता के विरोध और स्वतंत्रता संग्राम के डर से ब्रिटिश गवर्नर ने युवाओं को सरसैया घाट पर रिहा किया, जिससे गंगा मेले की शुरुआत हुई.
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इस साल 10 मार्च को गंगा मेला मनाया जाएगा, जिसमें "भैंसा ठेला" जुलूस राज्जन बाबू पार्क से सरसैया घाट तक जाएगा.
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