पहाड़ों की अनोखी परंपरा: पूजा और श्राद्ध में चमत्कारी हैं च्यूरा और तिमल के पत्ते.

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News18•26-02-2026, 20:53
पहाड़ों की अनोखी परंपरा: पूजा और श्राद्ध में चमत्कारी हैं च्यूरा और तिमल के पत्ते.
- •पहाड़ों में पूजा, कथा, हवन और श्राद्ध जैसे अनुष्ठानों में च्यूरा और तिमल के पत्तों से बने 'पूड़े' का उपयोग होता है.
- •सामान्य पूजा और शुभ कार्यों में च्यूरा के पत्तों से बने पूड़े का उपयोग होता है, जिन्हें धार्मिक रूप से शुद्ध और पवित्र माना जाता है.
- •श्राद्ध कर्मों के लिए तिमल के पत्तों का उपयोग अनिवार्य है, क्योंकि ये बड़े और मजबूत होते हैं, पिंड दान के लिए उपयुक्त माने जाते हैं.
- •यह परंपरा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, क्योंकि ये पूड़े पूरी तरह से इको-फ्रेंडली होते हैं और आसानी से खाद बन जाते हैं.
- •पंडित बलदेव दत्त भट्ट के अनुसार, इन पत्तों में रखी सामग्री की ऊर्जा संरक्षित रहती है और पूजा का सात्विक फल मिलता है, यह हमारी सांस्कृतिक विरासत है.
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