नंदा देवी राजजात यात्रा: 1925 के बाद कुमाऊं की भागीदारी क्यों हुई खत्म?

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News18•25-01-2026, 21:26
नंदा देवी राजजात यात्रा: 1925 के बाद कुमाऊं की भागीदारी क्यों हुई खत्म?
- •हर 12 साल में होने वाली नंदा राजजात यात्रा उत्तराखंड की एक महत्वपूर्ण धार्मिक तीर्थयात्रा है, जो आस्था और संस्कृति का प्रतीक है.
- •परंपरागत रूप से, गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों ने भाग लिया, लेकिन 1925 के बाद कुमाऊं की भागीदारी कम हो गई.
- •कुमाऊं की कम भागीदारी का मुख्य कारण चंद वंश के राजा आनंद सिंह का निधन था, जिन्होंने उनके दल का नेतृत्व किया था, और उसके बाद संगठित नेतृत्व का अभाव था.
- •खराब परिवहन, संचार और ब्रिटिश शासन ने भी कुमाऊं के निवासियों के लिए यात्रा में शामिल होना मुश्किल बना दिया था.
- •कुमाऊं की भागीदारी 2000 में फिर से स्थापित हुई, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच साझा आस्था मजबूत हुई.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: नेतृत्व के अभाव और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण 1925 के बाद नंदा राजजात यात्रा में कुमाऊं की भागीदारी कम हो गई.
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