उत्तराखंड पर गहराया संकट: पिघलते ग्लेशियर, सूखती नदियां दे रहीं विनाश का संकेत

देहरादून
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News18•21-01-2026, 17:55
उत्तराखंड पर गहराया संकट: पिघलते ग्लेशियर, सूखती नदियां दे रहीं विनाश का संकेत
- •उत्तराखंड, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध था, अब औद्योगीकरण और वनों की कटाई के कारण बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन का सामना कर रहा है.
- •हिमालय की चोटियाँ, जो पहले बर्फ से ढकी रहती थीं, अब बंजर दिख रही हैं, जिससे कृषि और जलविद्युत स्रोतों पर गंभीर बर्फबारी और बारिश की कमी का असर पड़ रहा है.
- •देहरादून जैसे शहरों में AQI का स्तर 200 के आसपास दर्ज किया जा रहा है, जो वाहनों और निर्माण से बढ़ते वायु प्रदूषण का संकेत है.
- •बुरंश का असमय खिलना और सामान्य से अधिक तापमान एक बाधित प्राकृतिक चक्र और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों की ओर इशारा करते हैं.
- •गिरता भूजल स्तर, सूखते प्राकृतिक झरने और बढ़ते भूस्खलन एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र परिवर्तन का संकेत देते हैं, जो मानव अस्तित्व के लिए खतरा है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: उत्तराखंड एक गंभीर पारिस्थितिक संकट के कगार पर है, जिसके लिए तत्काल सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता है.
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