दामोदर नदी का बदलता रास्ता: बर्धमान की 'लाइफलाइन' और कृषक सेतु खतरे में

पश्चिम बंगाल
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News18•30-01-2026, 16:14
दामोदर नदी का बदलता रास्ता: बर्धमान की 'लाइफलाइन' और कृषक सेतु खतरे में
- •दामोदर नदी हर साल धीरे-धीरे अपना रास्ता बदल रही है, जिससे निचले दामोदर बेसिन में बाढ़ बढ़ रही है और नदी किनारे के इलाकों को नुकसान हो रहा है.
- •विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नदी इसी तरह अपना रास्ता बदलती रही, तो कृषक सेतु को गंभीर नुकसान हो सकता है या वह ढह सकता है.
- •झारखंड के छोटा नागपुर पठार से निकलने वाली दामोदर नदी पूर्वी बर्धमान की कृषि के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी 592 किलोमीटर लंबी धारा बदल रही है.
- •बांधों के निर्माण से पहले दामोदर को 'दुःख की नदी' कहा जाता था; बांधों ने बाढ़ नियंत्रण और कृषि में मदद की, लेकिन अब वे नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बदल रहे हैं.
- •अवैध रेत खनन और गाद जमा होने से नदी का तल ऊपर उठ रहा है, जिससे निचले दामोदर बेसिन को नुकसान हो रहा है और मानसून के दौरान बाढ़ की स्थिति पैदा हो रही है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: दामोदर नदी का बदलता मार्ग और रेत खनन बर्धमान की कृषि और कृषक सेतु के लिए खतरा बन गया है.
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