বাঁশের শিল্পী
पश्चिम बंगाल
N
News1821-01-2026, 22:41

पूर्वी मेदिनीपुर के कारीगरों ने बांस शिल्प को नया जीवन दिया, नवाचार से बदली किस्मत.

  • पूर्वी मेदिनीपुर के पटाशपुर 2 ब्लॉक में 40 परिवार पारंपरिक बांस शिल्प पर निर्भर हैं.
  • प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग के कारण सूप, छलनी और टोकरियाँ जैसे दैनिक उपयोग के बांस उत्पादों की मांग घट गई थी.
  • कारीगरों ने नए और आकर्षक डिजाइन बनाकर और सजावटी घरेलू सामान बनाकर मांग बढ़ाने की पहल की है.
  • बांस की बढ़ती कीमतों और उत्पादन लागत के बावजूद, समुदाय, जिसमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं, शिल्प को बचाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं.
  • यह प्रयास केवल आजीविका के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण बंगाल की सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा को बनाए रखने के लिए भी है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: पूर्वी मेदिनीपुर के कारीगर नवाचार और सामुदायिक प्रयासों से पारंपरिक बांस शिल्प को पुनर्जीवित कर रहे हैं.

More like this

Loading more articles...