झारग्राम समाचार: सबाई घास ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ, 'खरपतवार' से बने उत्पाद विश्व स्तर पर लोकप्रिय
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सबई घास: झाड़ग्राम की 'खरपतवार' ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल रही, वैश्विक मांग बढ़ी.
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News18•23-03-2026, 20:12
सबई घास: झाड़ग्राम की 'खरपतवार' ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल रही, वैश्विक मांग बढ़ी.
•सबई घास, कभी 'खरपतवार' मानी जाती थी, अब झाड़ग्राम के सीमांत क्षेत्रों जैसे गोपीबल्लभपुर, नयाग्राम और बेलपहाड़ी में एक प्रमुख आर्थिक चालक है.
•सबई घास से बनी कलात्मक हस्तशिल्प घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सराहना प्राप्त कर रही है.
•झाड़ग्राम, नयाग्राम और गोपीबल्लभपुर ब्लॉकों में लगभग 48,000 परिवार सबई घास की खेती, रस्सी बनाने और हस्तशिल्प निर्माण पर निर्भर हैं.
•सरकारी और गैर-सरकारी प्रशिक्षण पहलों ने कारीगरों को पारंपरिक रस्सी बनाने से हटकर विभिन्न सजावटी वस्तुएं बनाने में सक्षम बनाया है.
•सबई उद्योग स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाता है, वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ावा देता है और स्थानीय पर्यटन बिक्री को बढ़ाता है.