बांग्लादेश में जमात का गुप्त उदय: हसीना के बाद इस्लामी ताकत ने कैसे सत्ता हथियाई.

ओपिनियन
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News18•30-12-2025, 08:50
बांग्लादेश में जमात का गुप्त उदय: हसीना के बाद इस्लामी ताकत ने कैसे सत्ता हथियाई.
- •1941 में स्थापित जमात-ए-इस्लामी ने 1971 के नरसंहार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसका चुनावी इतिहास भ्रामक रहा है, 2008 में 4.7% वोट शेयर था.
- •शेख हसीना के शासनकाल में कार्रवाई के बावजूद, जमात की पंजीकृत सदस्यता 2013 में 6,000 से बढ़कर 2024 में अनुमानित 27,000 हो गई.
- •इनोवेशन कंसल्टिंग और आईआरआई के 2025 के सर्वेक्षणों से पता चलता है कि जमात आगामी चुनावों में 26-30% वोट हासिल कर सकती है, गठबंधन में और भी अधिक.
- •जमात ने कथित तौर पर हसीना के पतन को अंजाम दिया, छात्रों को मोहरा बनाया, फिर मुहम्मद यूनुस को हेरफेर किया और एनसीपी का फायदा उठाया, जबकि धर्मनिरपेक्ष छवि पेश की.
- •समूह पर पाकिस्तान की आईएसआई को आमंत्रित करने, कट्टरता शिविर स्थापित करने और भारत विरोधी भावनाएं भड़काने का आरोप है, जिसका लक्ष्य बांग्लादेश की प्रगति को उलटना है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: जमात-ए-इस्लामी ने बांग्लादेश में रणनीतिक रूप से सत्ता मजबूत की है, जिससे उसके लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष आधार खतरे में हैं.
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