Nicolas Maduro. (AFP photo)
ओपिनियन
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News1805-01-2026, 19:31

मादुरो की गिरफ्तारी और उपनिवेशवाद की वापसी: क्रूर शक्ति से बदल रही वैश्विक व्यवस्था.

  • लेख में तर्क दिया गया है कि "क्रूर शक्ति" और "नव-उपनिवेशवाद" लौट आए हैं, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के भ्रम को बदल रहे हैं.
  • राष्ट्रपति ट्रंप के कार्य, जैसे विस्तारित मोनरो सिद्धांत और चीन के सैन्य उदय को रोकना, शक्ति के खुले प्रदर्शन की इस बदलाव का उदाहरण हैं.
  • अमेरिका को एक परोपकारी के बजाय "किराए का सैनिक" के रूप में चित्रित किया गया है, जो यूरोप जैसे सहयोगियों को अपने दम पर छोड़ रहा है और अपनी सैन्य शक्ति का उपयोग शर्तों को तय करने के लिए कर रहा है.
  • छोटे राष्ट्र इस नई "शक्ति हड़पने" में "निगल लिए जाने" के जोखिम का सामना कर रहे हैं, जबकि बड़े राष्ट्रों को अमेरिका के साथ तालमेल बिठाना होगा या परिणामों का सामना करना होगा.
  • लेखक का सुझाव है कि अमेरिका ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है, और दुनिया अब नियमों के बिना काम कर रही है, जिसमें "वैश्विक पुलिसकर्मी" एक "वैश्विक डाकू" के रूप में कार्य कर रहा है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: दुनिया "नव-उपनिवेशवाद" के युग में प्रवेश कर चुकी है, जहाँ क्रूर सैन्य शक्ति वैश्विक व्यवस्था तय करती है.

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