ट्रम्पवाद: पश्चिम ने अपनी ही बनाई व्यवस्था को नैतिक रूप से कैसे खोखला किया.

ओपिनियन
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News18•12-01-2026, 16:53
ट्रम्पवाद: पश्चिम ने अपनी ही बनाई व्यवस्था को नैतिक रूप से कैसे खोखला किया.
- •पश्चिम, जो कभी प्रगतिवाद और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था का प्रतीक था, पर अपनी ही प्रणाली को नैतिक रूप से खोखला करने का आरोप है.
- •द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक जैसे संस्थानों का उद्देश्य शांति और न्यायपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संबंध स्थापित करना था, जो पिछले युगों से बेहतर थे.
- •शीत युद्ध के बाद उदार लोकतंत्र के निर्विवाद प्रभुत्व के बारे में आशावाद तब फीका पड़ गया जब पश्चिमी मानक व्यवहार में कमजोर पड़ने लगे.
- •ब्रेक्सिट, वोकवाद और डोनाल्ड ट्रम्प के 'नव-साम्राज्यवाद' को इस क्षरण के उदाहरण के रूप में उद्धृत किया गया है, जो उदार सिद्धांतों को चुनौती देते हैं.
- •वेनेजुएला में अमेरिका की कार्रवाइयां, जिन्हें 'कानून प्रवर्तन' के रूप में प्रस्तुत किया गया, यूक्रेन में रूस के 'विशेष सैन्य अभियान' की तुलना में एक दोहरा मापदंड उजागर करती हैं, जो पश्चिमी पाखंड को दर्शाता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: पश्चिम के कार्य, विशेष रूप से ट्रम्प के तहत, उसके द्वारा निर्मित वैश्विक व्यवस्था को कमजोर करने वाले नैतिक पाखंड को उजागर करते हैं.
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