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विचार | महादेवी वर्मा से शिवानी तक: कलम से पितृसत्ता को चुनौती देने वाली महिलाएं
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कलम की शक्ति: महिला लेखिकाओं ने हिंदी साहित्य में पितृसत्ता को कैसे बदला.
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News18
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08-03-2026, 20:40
कलम की शक्ति: महिला लेखिकाओं ने हिंदी साहित्य में पितृसत्ता को कैसे बदला.
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शिवानी के 'चौदह फेरे' की नायिका अहिल्या ने पितृसत्तात्मक अपेक्षाओं को चुनौती दी, बलिदान के बजाय गरिमा और स्वतंत्रता चुनी.
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महादेवी वर्मा की 'श्रृंखला की कड़ियाँ' ने नारीवादी नींव रखी, अदृश्य बाधाओं और विवाह को दासता के रूप में उजागर किया.
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कृष्णा सोबती की 'मित्रो मरजानी' ने महिला इच्छाओं को साहसपूर्वक खोजा, सामाजिक वर्जनाओं और रूढ़िवादी परंपराओं को चुनौती दी.
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मन्नू भंडारी की कृतियों, जैसे 'यही सच है', ने महिला पात्रों को अपनी खुशी खोजने का अपराध-मुक्त अधिकार दिया.
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मृदुला गर्ग की 'चित्तकोबरा' और गीतांजलि श्री के उपन्यासों ने महिलाओं के जटिल आंतरिक जीवन और उनकी एजेंसी को उजागर करना जारी रखा.
News18 पर अंग्रेज़ी में पूरा लेख पढ़ें
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