Indian Railways today is a pale shadow of the golden era of the 1950s and 1960s, having lost its predominant position as the nation’s lifeline. (Representational/PTI Photo)
ओपिनियन
N
News1824-12-2025, 17:21

किराया बढ़ाने के डर ने भारतीय रेलवे के स्वर्णिम युग को पटरी से उतारा.

  • भारतीय रेलवे की बाजार हिस्सेदारी 1949 में 90% यात्री/86% माल से घटकर आज लगभग 10% यात्री/25% माल रह गई है.
  • स्वतंत्रता के बाद से यात्री किराए में वृद्धि न करने की राजनीतिक अनिच्छा के कारण सेवाओं में गिरावट और भारी नुकसान हुआ.
  • दिनेश त्रिवेदी सहित कई रेल मंत्रियों को किराया बढ़ाने के प्रयास के लिए कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा या उन्हें अपनी नौकरी गंवानी पड़ी.
  • यात्री तेजी से बेहतर बस सेवाओं और हवाई यात्रा का विकल्प चुन रहे हैं, जिससे रेलवे की भूमिका कम हो रही है.
  • माल ढुलाई सेवाएं कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर अत्यधिक निर्भर हैं, जो "नेट जीरो" लक्ष्यों के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना कर रही हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: किराए में वृद्धि के राजनीतिक डर ने भारतीय रेलवे को पंगु बना दिया, जिससे इसका पतन और बाजार हिस्सेदारी में कमी आई.

More like this

Loading more articles...