IndiGo संकट: एकाधिकार की कीमत और भारत के आसमान में बढ़ती एकाग्रता का खतरा.

ओपिनियन
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News18•20-12-2025, 15:33
IndiGo संकट: एकाधिकार की कीमत और भारत के आसमान में बढ़ती एकाग्रता का खतरा.
- •IndiGo के परिचालन संकट ने भारत के विमानन बाजार की भेद्यता को उजागर किया, जो अत्यधिक एकाग्रता के कारण राष्ट्रीय गतिशीलता को पंगु बना रहा है.
- •भारत सार्वजनिक एकाधिकार से निजी द्वैध/अल्पाधिकार की ओर बढ़ा है, जिससे "राष्ट्रीय चैंपियन" बने हैं लेकिन उपभोक्ता विकल्प और बाजार लचीलापन कम हुआ है.
- •IndiGo लगभग दो-तिहाई घरेलू यात्रियों को ले जाता है; इसकी बाधाएं एक दोषपूर्ण बाजार डिजाइन को उजागर करती हैं जिसमें अतिरेक और प्रणालीगत जोखिम शमन की कमी है.
- •मौजूदा प्रतिस्पर्धा कानून विलय से उत्पन्न न होने वाले प्रभुत्व के प्रति अंधा है, जबकि उपभोक्ता संरक्षण सामूहिक नुकसान की घटनाओं के लिए कमजोर है, जिसमें स्वचालित मुआवजा या सामूहिक निवारण का अभाव है.
- •DGCA जैसे नियामकों के पास संरचनात्मक उपचार या आर्थिक दंड लगाने की शक्ति नहीं है, जिससे अर्थव्यवस्था नाजुक और उपभोक्ता आवश्यक सेवा विफलताओं के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: IndiGo संकट एकाधिकार की उच्च कीमत दिखाता है; भारत को उपभोक्ता संरक्षण के लिए मजबूत विनियमन की आवश्यकता है.
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