शहीदी सप्ताह: भारत की निडर आस्था, अंतरात्मा और प्रतिरोध की अमिट विरासत.

ओपिनियन
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News18•26-12-2025, 19:04
शहीदी सप्ताह: भारत की निडर आस्था, अंतरात्मा और प्रतिरोध की अमिट विरासत.
- •शहीदी सप्ताह (शहीदों का सप्ताह) दिसंबर 1704-1705 में गुरु गोबिंद सिंह के परिवार के अद्वितीय बलिदानों को याद करता है.
- •गुरु गोबिंद सिंह के चार पुत्रों और माता गुजरी ने धार्मिक उत्पीड़न और अत्याचार का विरोध करते हुए, आस्था की स्वतंत्रता के लिए शहादत दी.
- •बड़े साहिबजादे, अजीत सिंह (18) और जुझार सिंह (14), चमकौर में शहीद हुए; छोटे साहिबजादे, जोरावर सिंह (9) और फतेह सिंह (6-7), ने सरहिंद में धर्म न छोड़ने पर शहादत दी.
- •यह इतिहास, गुरु तेग बहादुर की शहादत में निहित, भारत की बहुलवाद और अन्याय के प्रतिरोध की नैतिक विरासत को परिभाषित करता है.
- •26 दिसंबर को अब वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो छोटे साहिबजादों के साहस और दृढ़ विश्वास की राष्ट्रीय पहचान है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: शहीदी सप्ताह भारत की आस्था, अंतरात्मा और अत्याचार के खिलाफ प्रतिरोध की गहरी विरासत का प्रतीक है.
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