उपमहाद्वीप में 'विरोध अर्थव्यवस्था': वैधता बनी कथा युद्ध का हथियार.

ओपिनियन
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News18•28-12-2025, 17:09
उपमहाद्वीप में 'विरोध अर्थव्यवस्था': वैधता बनी कथा युद्ध का हथियार.
- •उपमहाद्वीप में विरोध प्रदर्शन अब घरेलू सौदेबाजी के बजाय बाहरी संकेत, कूटनीतिक प्रतिक्रिया और कथा प्रभुत्व के लिए होते हैं.
- •यह 'विरोध अर्थव्यवस्था' तब पनपती है जब संस्थागत विश्वास कम होता है, जैसा कि बांग्लादेश में आर्थिक वृद्धि के बावजूद राजनीतिक वैधता में गिरावट में देखा गया.
- •भारत अक्सर ऐतिहासिक भूमिका के कारण निशाना बनता है, बांग्लादेश और पाकिस्तान में वैधता की कमी को भरने के लिए भारत विरोधी बयानबाजी का उपयोग होता है.
- •एल्गोरिथम मीडिया में विरोध की सफलता अब पहुंच से मापी जाती है, भू-राजनीतिक ढांचा व्यापक प्रसार के लिए कथाओं को बढ़ाता है.
- •दूतावासों को निशाना बनाया जाता है क्योंकि वे ध्यान आकर्षित करने वाले बिंदु हैं जो मुद्दों को हल किए बिना अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया को मजबूर करते हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: उपमहाद्वीप में विरोध अब घरेलू नीति परिवर्तन के बजाय बाहरी कथा प्रभुत्व को प्राथमिकता देते हैं.
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