अश्वगंधा: खारे पानी में भी बंपर उपज, सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए वरदान.

कृषि
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News18•06-01-2026, 05:51
अश्वगंधा: खारे पानी में भी बंपर उपज, सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए वरदान.
- •अश्वगंधा सूखाग्रस्त और खारे पानी वाले क्षेत्रों के किसानों के लिए वरदान है, जो कम लागत में अधिक मुनाफा देती है.
- •यह एक नकदी फसल है जिसकी आयुर्वेदिक दवाओं में निरंतर मांग रहती है, टॉनिक, याददाश्त और तनाव कम करने में उपयोगी है.
- •खेती के लिए हल्की दोमट या रेतीली मिट्टी, 20-35°C तापमान और कम बारिश उपयुक्त है; फसल 150-180 दिनों में तैयार होती है.
- •बुवाई के लिए 7-8 किलो बीज प्रति हेक्टेयर, गहरी जुताई, खाद, और समय पर सिंचाई (खारे पानी से भी) आवश्यक है.
- •इसमें कीट और रोगों का प्रकोप कम होता है; इसकी जड़ें, पत्ते और फल औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: अश्वगंधा कम पानी और खारे पानी में भी अधिक मुनाफा देने वाली औषधीय फसल है.
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