समस्तीपुर जिले के मोरवा उत्तरी क्षेत्र के किसान सुजीत कुमार झा ने इस अनोखे प्रयोग की शुरुआत की है. उन्होंने बांग्लादेश से खफाली गेहूं का बीज मंगाकर अपने खेत में इसकी खेती शुरू की. सुजीत बताते हैं कि वे बिरसा मुंडा कृषि विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण के लिए गए थे, जहां खफाली गेहूं पर चर्चा हुई. वहीं से प्रेरणा लेकर उन्होंने इसे अपनाने का फैसला किया.
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News1825-01-2026, 20:50

बिहार में बांग्लादेशी खाफली गेहूं की जैविक खेती, डायबिटीज मरीजों के लिए वरदान

  • समस्तीपुर, बिहार के सुजीत कुमार झा बांग्लादेश से आयातित खाफली गेहूं की जैविक खेती कर रहे हैं.
  • बिरसा मुंडा कृषि विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण के दौरान खाफली गेहूं के बारे में जानने के बाद उन्हें इसकी खेती की प्रेरणा मिली.
  • सुजीत ने 15,000 रुपये में बांग्लादेश से एक क्विंटल बीज आयात किए, जिससे बेहतर उपज और उच्च बाजार मूल्य की उम्मीद है.
  • यह गेहूं पूरी तरह से जैविक रूप से जीवामृत का उपयोग करके उगाया जाता है, जिसमें कोई रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक नहीं होते, जिससे लागत कम आती है.
  • खाफली गेहूं को डायबिटीज और उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए फायदेमंद माना जाता है, जिसका आटा भविष्य में 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक सकता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बिहार के एक किसान द्वारा बांग्लादेशी खाफली गेहूं की जैविक खेती स्वास्थ्य लाभ और उच्च आय का वादा करती है.

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