मेथी की खेती: छाछिया और मोयला का काम तमाम, जैविक तरीके बढ़ाएंगे आपकी कमाई.

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News18•06-02-2026, 11:07
मेथी की खेती: छाछिया और मोयला का काम तमाम, जैविक तरीके बढ़ाएंगे आपकी कमाई.
- •बदलते मौसम में दिन का तापमान बढ़ने और रात में ओस गिरने से मेथी की फसल में छाछिया और मोयला जैसे रोग पनपते हैं.
- •छाछिया रोग पत्तियों पर सफेद चूर्ण बनाता है, जिससे पौधे का विकास रुक जाता है, जबकि मोयला कोमल भागों से रस चूसकर फसल को सुखा देता है.
- •कृषि विशेषज्ञ दिनेश जाखड़ के अनुसार, इन रोगों से बचाव के लिए रासायनिक दवाओं के बजाय जैविक तरीकों का उपयोग करना चाहिए, जिससे लागत कम होती है और फसल की गुणवत्ता बनी रहती है.
- •खेत की तैयारी के दौरान 2 टन प्रति हेक्टेयर की दर से नीम खली का प्रयोग मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीटों और फंगस को खत्म करता है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है.
- •गंभीर संक्रमण होने पर 2.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर ट्राइकोडर्मा विरिडी का उपयोग करें या 10 दिन के अंतराल पर 5% नीम बीज गिरी अर्क (NSKE) का छिड़काव करें, जो कीटों के जीवन चक्र को बाधित करता है.
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