अविनाश बताते हैं कि करीब तीन साल पहले उन्होंने बेल की दो अच्छी प्रजातियों को देखा, जिनमें अलग-अलग खूबियां थीं. तभी उनके मन में विचार आया कि क्यों न इन दोनों प्रजातियों को मिलाकर एक नई और बेहतर किस्म विकसित की जाए. इसी सोच के साथ उन्होंने ग्राफ्टिंग तकनीक के जरिए दोनों प्रजातियों को मिलाकर एक नया प्रभेद तैयार किया. शुरुआत में इस बेल को ट्रायल के तौर पर लगाया गया. जब पौधे फल देने लगे और उनका स्वाद व गुणवत्ता परखी गई, तो नतीजे उम्मीद से कहीं बेहतर निकले.
कृषि
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News1827-12-2025, 19:36

मुजफ्फरपुर के अविनाश ने विकसित की 'बनारसी M' बेल, किसानों की आय में क्रांति.

  • मुजफ्फरपुर के युवा किसान अविनाश ने दो किस्मों को ग्राफ्टिंग से जोड़कर 'बनारसी M' बेल विकसित की, जो किसानों की पहली पसंद बनी.
  • इस बेल में कम बीज, बड़ा आकार, मीठा स्वाद और कांटे रहित पेड़ हैं, जिससे खेती और कटाई आसान हो जाती है.
  • 'बनारसी M' बेल सिर्फ दो साल में फल देना शुरू कर देती है और प्रति पेड़ 500-600 रुपये की वार्षिक आय देती है.
  • 60 रुपये प्रति पौधे की कीमत पर, मुजफ्फरपुर और पड़ोसी जिलों के 300 से अधिक किसानों ने इसे अपनाया है.
  • किसानों का मानना है कि सरकारी प्रोत्साहन से यह किस्म क्षेत्र की कृषि आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: अविनाश की 'बनारसी M' बेल किसानों को लाभदायक, आसान और उच्च मांग वाली फल किस्म प्रदान करती है.

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