कृषि वैज्ञानिक के अनुसार केंचुआ खाद के लिए आइसिना फोटिडा प्रजाति के केंचुए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं. यह साउथ अफ्रीका की प्रजाति है, जो गोबर को तेजी से खाकर उसे खाद में बदल देती है. लगभग ढाई महीने में टैंक में काला, दानेदार पदार्थ दिखाई देने लगता है, जो तैयार केंचुआ खाद होती है.
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News1831-01-2026, 11:01

वर्मीकम्पोस्ट से बढ़ेगी मिट्टी की ताकत, किसानों की आय का नया जरिया

  • कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार के अनुसार, वर्मीकम्पोस्ट में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश पारंपरिक गोबर खाद (0.5%) की तुलना में लगभग 1.5% अधिक होता है.
  • यह खाद फसलों को अधिक पोषण देती है और मिट्टी की संरचना में सुधार करती है, जिससे खेत की उर्वरता बढ़ती है.
  • वर्मीकम्पोस्ट बनाने के लिए 10x3x2.5 फीट का टैंक बनाएं, जिसमें पत्तियां, पुआल, जैविक कचरा और 20-25 दिन पुराना गोबर परत-दर-परत डालें.
  • टैंक में लगभग 1500 आइसेनिया फेटिडा प्रजाति के केंचुए डालें, जो दक्षिण अफ्रीका से हैं और तेजी से गोबर को खाद में बदलते हैं.
  • ढाई महीने में एक टैंक से 5-6 क्विंटल वर्मीकम्पोस्ट तैयार होता है, और केंचुओं की संख्या चार गुना बढ़ जाती है, जिन्हें किसान बेचकर अतिरिक्त आय कमा सकते हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: वर्मीकम्पोस्ट मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है और किसानों को खाद उत्पादन व केंचुए बेचकर आय बढ़ाने का एक मजबूत साधन प्रदान करता है.

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