Bollywood Cult Movies : कुछ फिल्में जब सिनेमाघरों में रिलीज होती हैं, तब कई वजहों से फ्लॉप हो जाती हैं. कुछ की कहानी दर्शक शुरुआत में समझ नहीं पाते. कुछ को ज्यादा स्क्रीन नहीं मिल पातीं. ऐसा कम बजट की फिल्मों के साथ ज्यादा होता है. जब यही फिल्में टीवी-यूट्यूब पर आती हैं तो दिल जीत लेती हैं. तीन साल के अंतराल में ऐसी ही दो फिल्में सिनेमाघरों में आई थीं. दोनो बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गईं लेकिन आज दोनों की गिनती अंडररेटेड फिल्मों में होती है. एक मूवी ने बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड भी जीता. इन फिल्मों के प्रति दर्शकों की दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक को IMDB पर 7.5 जबकि दूसरी फिल्म को 7.9 की रेटिंग मिली हुई है. ये दोनों फिल्में कौन सी हैं, आइये जानते हैं.......
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News1805-01-2026, 21:36

बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होकर भी 'फंस गए रे ओबामा' और 'आंखों देखी' बनीं कल्ट क्लासिक.

  • 'फंस गए रे ओबामा' (2010) और 'आंखों देखी' (2014) बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं, लेकिन कल्ट क्लासिक बनकर दर्शकों के दिलों में जगह बनाई और IMDb पर उच्च रेटिंग पाईं.
  • सुभाष कपूर द्वारा निर्देशित व्यंग्यात्मक ब्लैक कॉमेडी 'फंस गए रे ओबामा' 2008-09 की आर्थिक मंदी पर आधारित थी, जिसमें इश्तियाक खान और संजय मिश्रा के यादगार प्रदर्शन थे.
  • 6 करोड़ के बजट और 14 करोड़ के कलेक्शन के बावजूद 'फंस गए रे ओबामा' को फ्लॉप माना गया, लेकिन इसकी अनूठी उत्तरी भारतीय पृष्ठभूमि और हास्य ने दर्शकों को प्रभावित किया.
  • रजत कपूर की 'आंखों देखी' ने संजय मिश्रा के 'बाऊजी' किरदार के माध्यम से अनुभववाद की पड़ताल की, जो केवल अपनी आँखों से देखी गई बातों पर विश्वास करते थे, और इसे समीक्षकों द्वारा सराहा गया.
  • खराब बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन के बावजूद 'आंखों देखी' ने तीन फिल्मफेयर पुरस्कार जीते (संजय मिश्रा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, रजत कपूर को सर्वश्रेष्ठ फिल्म और सर्वश्रेष्ठ कहानी).

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बॉक्स ऑफिस की असफलता 'फंस गए रे ओबामा' और 'आंखों देखी' को कल्ट क्लासिक बनने से नहीं रोक पाई.

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