नई दिल्ली. साल 1975 बॉलीवुड के इतिहास में एक मील का पत्थर था, क्योंकि यही वह साल था जब दुनिया को 'गब्बर सिंह' जैसा खतरनाक विलेन मिला. अमजद खान की रोंगटे खड़े कर देने वाली आवाज और खतरनाक एक्टिंग ने ऐसा डर पैदा किया कि इंडस्ट्री उन्हें सिर्फ विलेन के तौर पर ही देख सकती थी. लेकिन सिर्फ छह साल बाद, 1981 में एक डायरेक्टर ने कुछ ऐसा कर दिखाया जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. डायरेक्टर राकेश कुमार ने गब्बर सिंह को भगवान जैसा दोस्त बनाने का रिस्क लिया और नतीजा एक ऐसी फिल्म बनी जिसे आज एवरग्रीन माना जाता है- 'याराना.'
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News1822-02-2026, 21:56

खूंखार विलेन पर दांव, सबने कहा डूबेगी फिल्म, रिलीज पर अमिताभ बच्चन पर भारी पड़े अमजद खान.

  • निर्देशक राकेश कुमार ने 1981 की फिल्म 'याराना' में 'गब्बर सिंह' अमजद खान को एक बलिदानी दोस्त 'बिशन' के रूप में कास्ट किया, जिससे उद्योग हैरान रह गया.
  • असफलता की भविष्यवाणियों के बावजूद, अमजद खान के बिशन के चित्रण ने दर्शकों के साथ गहरा जुड़ाव बनाया, जो अमिताभ बच्चन के किरदार 'किशन' के लिए अपनी संपत्ति गिरवी रखता है.
  • बिशन के रूप में अमजद खान का भावनात्मक प्रदर्शन इतना शक्तिशाली था कि कई आलोचकों ने महसूस किया कि यह कुछ दृश्यों में सुपरस्टार अमिताभ बच्चन से भी आगे निकल गया.
  • फिल्म के गाने, जिनमें 'सारा जमाना' और 'तेरे जैसा यार कहां' शामिल हैं, प्रतिष्ठित बन गए, बाद वाले ने अमजद खान और अमिताभ बच्चन को एक महान दोस्ती की जोड़ी के रूप में स्थापित किया.
  • 'याराना' 1981 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक बन गई, यह साबित करते हुए कि प्रतिभा छवि और दर्शकों की धारणा से परे है.

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