नई दिल्ली: 'ये सर्द रात, ये आवारगी, ये नींद का बोझ...हम अपने शहर में होते तो घर चले जाते', यह नज्म उस शख्सियत के स्ट्रगल को बखूबी बयां करती है, जो हिंदी सिनेमा में कई दशकों से जगमगा रहा है. उसने अपनी काबिलियत से सिनेमा को नया रूप दिया. हालांकि, उन्हें भी जिंदगी में कई बार बुरे वक्त का सामना करना पड़ा. उन्हें भूखा रहना पड़ा और एक वक्त ऐसा भी आया जब उनके पास पहनने के लिए कपड़े भी नहीं थे, लेकिन हर बार वह उगते सूरज की तरह सिनेमा के कैनवास में छाए. (फोटो साभार: Instagram@azmishabana18)
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News1820-12-2025, 17:12

जावेद अख्तर का संघर्ष: भूख से स्टारडम तक, एक फैसले ने बदली किस्मत.

  • जावेद अख्तर 19 साल की उम्र में गुरु दत्त के सहायक बनने के सपने के साथ मुंबई आए, लेकिन दत्त के निधन के बाद तुरंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
  • उन्होंने अत्यधिक गरीबी झेली, सड़कों और रेलवे स्टेशनों पर सोए, कई दिनों तक भूखे रहे और उनके पास केवल एक फटा हुआ पैंट था.
  • एक आकर्षक घोस्टराइटिंग प्रस्ताव को अस्वीकार करने का महत्वपूर्ण निर्णय, पैसे से ऊपर अपने नाम को प्राथमिकता देना, उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ.
  • उन्हें एस.एम. सागर की फिल्म 'सरहदी लुटेरा' के सेट पर बड़ा मौका मिला, जहाँ उन्हें संवाद लिखने का अवसर मिला और वे सलीम खान से मिले.
  • इससे प्रतिष्ठित सलीम-जावेद जोड़ी बनी, जिन्होंने 'शोले' और 'जंजीर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से हिंदी सिनेमा में क्रांति ला दी.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: जावेद अख्तर का संघर्ष, दृढ़ता और एक सही फैसले ने उन्हें महान लेखक बनाया.

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