जावेद अख्तर का संघर्ष: भूख से स्टारडम तक, एक फैसले ने बदली किस्मत.

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News18•20-12-2025, 17:12
जावेद अख्तर का संघर्ष: भूख से स्टारडम तक, एक फैसले ने बदली किस्मत.
- •जावेद अख्तर 19 साल की उम्र में गुरु दत्त के सहायक बनने के सपने के साथ मुंबई आए, लेकिन दत्त के निधन के बाद तुरंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
- •उन्होंने अत्यधिक गरीबी झेली, सड़कों और रेलवे स्टेशनों पर सोए, कई दिनों तक भूखे रहे और उनके पास केवल एक फटा हुआ पैंट था.
- •एक आकर्षक घोस्टराइटिंग प्रस्ताव को अस्वीकार करने का महत्वपूर्ण निर्णय, पैसे से ऊपर अपने नाम को प्राथमिकता देना, उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ.
- •उन्हें एस.एम. सागर की फिल्म 'सरहदी लुटेरा' के सेट पर बड़ा मौका मिला, जहाँ उन्हें संवाद लिखने का अवसर मिला और वे सलीम खान से मिले.
- •इससे प्रतिष्ठित सलीम-जावेद जोड़ी बनी, जिन्होंने 'शोले' और 'जंजीर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से हिंदी सिनेमा में क्रांति ला दी.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: जावेद अख्तर का संघर्ष, दृढ़ता और एक सही फैसले ने उन्हें महान लेखक बनाया.
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