नई दिल्ली. एक छोटे से पंजाबी गांव में जन्मा यह बच्चा सड़कों पर घूमने वाले फकीर की मधुर आवाज से इतना प्रभावित हुआ कि उसकी जिंदगी संगीत की हो गई. फकीर के पीछे-पीछे चलकर, उसकी भक्ति भरी धुनें सुनकर और कभी-कभी नकल उतारकर उसने स्वरों से प्यार कर लिया. परिवार रूढ़िवादी था, संगीत को गुनाह समझता था, मगर उसकी लगन ने सबको जीत लिया. बस यहीं से शुरू हुई एक ऐसी आवाज की यात्रा, जो भारतीय सिनेमा की सबसे अमर धरोहर बनी. इस स्वर ने 11 भारतीय भाषाओं में लगभग 26,000 गाने गाए- हिंदी, पंजाबी, बंगाली, मराठी, गुजराती, तेलुगु, कन्नड़, सिंधी, असमिया और अन्य में. रोमांस की मिठास, दर्द की गहराई, देशभक्ति का जोश, भजन की भक्ति, क़व्वाली का रंग और तेज नृत्य संगीत-हर भाव को इसने अपनी लचीलापन और मिठास से समेट लिया.
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News1824-12-2025, 07:51

फकीर से प्रेरणा लेकर बने 'आवाज के फरिश्ता' मोहम्मद रफी, गाए 26,000 गाने.

  • महान गायक मोहम्मद रफी बचपन में एक फकीर की आवाज से प्रेरित होकर संगीत की दुनिया में आए, जबकि उनका परिवार रूढ़िवादी था.
  • उन्होंने 11 भारतीय भाषाओं में लगभग 26,000 गाने गाए, विभिन्न भावनाओं और शैलियों में महारत हासिल की, और 'आवाज के फरिश्ता' कहलाए.
  • रफी साहब का दिलीप कुमार के साथ गहरा रिश्ता था, दिलीप कुमार को लगता था कि रफी की आवाज उनकी अपनी है, और उन्होंने उनकी अनुकूलन क्षमता की प्रशंसा की.
  • उन्होंने 1967 की फिल्म 'अमन' के सुपरहिट युगल गीत 'आज की रात ये कैसी रात' की रिकॉर्डिंग के दौरान घबराई हुई सायरा बानो को प्रोत्साहित किया था.
  • रफी का 31 जुलाई, 1980 को 55 वर्ष की आयु में निधन हो गया, उन्होंने 'आस पास' के लिए अपना अंतिम गीत रिकॉर्ड किया था; उनके अंतिम संस्कार में भारी बारिश के बावजूद 10,000 लोग शामिल हुए.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: फकीर से प्रेरित होकर मोहम्मद रफी 'आवाज के फरिश्ता' बने, 26,000 गाने गाकर एक अमर विरासत छोड़ गए.

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