ओडिशा बना राष्ट्रीय हथकरघा राजधानी: कलात्मकता और सशक्तिकरण की विरासत

नौकरियां
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News18•25-01-2026, 12:33
ओडिशा बना राष्ट्रीय हथकरघा राजधानी: कलात्मकता और सशक्तिकरण की विरासत
- •ओडिशा को भारत की राष्ट्रीय हथकरघा राजधानी के रूप में मान्यता प्राप्त है, क्योंकि यहां कुशल बुनकरों की संख्या अधिक है और इसकी समृद्ध परंपरा है.
- •यह राज्य अपनी पारंपरिक इकत बुनाई के लिए प्रसिद्ध है, जिसे स्थानीय रूप से बंधा के नाम से जाना जाता है, जहां बुनाई से पहले धागों को बांधकर रंगा जाता है.
- •ओडिशा के लोकप्रिय हथकरघा उत्पादों में संबलपुरी, बोमकाई, खंडुआ रेशम, पासा पाली और कोटपाड कपड़े शामिल हैं, जो अपने चमकीले रंगों, पारंपरिक डिजाइनों और आदिवासी कला के लिए जाने जाते हैं.
- •ओडिशा में हथकरघा उद्योग ग्रामीण परिवारों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो महिलाओं को सशक्त बनाता है और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करता है.
- •ओडिशा के हथकरघा वस्त्र, जो अक्सर पौराणिक कथाओं और प्रकृति की कहानियों को दर्शाते हैं, वैश्विक पहचान प्राप्त करते हैं और राष्ट्रीय मेलों में प्रदर्शित होते हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: ओडिशा भारत की राष्ट्रीय हथकरघा राजधानी है, जो अपनी अनूठी इकत बुनाई, विविध उत्पादों और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रसिद्ध है.
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