कृष्णदेवराय ने सबसे पहले बीजापुर के इस्माइल आदिल शाह को चुनौती दी और रायचूर दोआब के लिए निर्णायक युद्ध लड़ा. 1520 की प्रसिद्ध रायचूर लड़ाई में उन्होंने आधुनिक तोपों और रणनीति का उपयोग किया. पुर्तगालियों से घोड़े और तोपें लेकर उन्होंने सेना को मजबूत बनाया. उनकी जीत ने विजयनगर को दक्षिण भारत की सबसे शक्तिशाली सैन्य ताकत बना दिया और सीमाएं कृष्णा नदी से तमिल क्षेत्र तक फैल गईं.
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News1820-02-2026, 13:17

आंखें फोड़ने का फरमान, पर किस्मत ने बनाया दक्षिण भारत का भगवान: कृष्णदेवराय की कहानी.

  • कृष्णदेवराय को अंधा करने का आदेश दिया गया था, लेकिन मंत्री सालुवा थिम्मारासु ने बकरी की आंखें दिखाकर उन्हें बचाया.
  • 1509 ई. में सिंहासन पर बैठने के बाद, कृष्णदेवराय को बीजापुर सल्तनत और आंतरिक विद्रोहों से चुनौतियों का सामना करना पड़ा.
  • उन्होंने 1520 में रायचूर के प्रसिद्ध युद्ध में निर्णायक जीत हासिल की, जिससे विजयनगर दक्षिण भारत की सबसे शक्तिशाली सैन्य शक्ति बन गया.
  • उनके शासनकाल को सांस्कृतिक उन्नति के स्वर्ण युग के रूप में जाना जाता है, जिसमें 'अष्टदिग्गज' और स्वयं कृष्णदेवराय द्वारा रचित 'आमुक्तमाल्यदा' शामिल है.
  • विजयनगर उनके शासन में 'सोने का शहर' बन गया, जो मंदिरों, सिंचाई प्रणालियों और व्यापार मार्गों के विकास के लिए जाना जाता था.

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