आयुर्वेदिक औषधि हरड़ 
जीवनशैली
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News1831-12-2025, 09:36

हरड़: आयुर्वेद की 'माँ समान औषधि', शरीर को बनाए वज्र जैसा मजबूत.

  • आयुर्वेद में हरड़ (हरितकी) को 'माँ समान औषधि' कहा गया है, जो शरीर को धीरे-धीरे पोषण, सुरक्षा और शुद्ध करती है, तीनों दोषों - वात, पित्त और कफ को संतुलित करती है.
  • यह एक दुर्लभ 'रसायन औषधि' है जिसे 'सर्वदोषहर' कहते हैं, जो वात को स्थिर करती है, पित्त की गर्मी शांत करती है और कफ की जड़ता दूर करती है, जिससे शरीर शुद्ध होता है.
  • पाचन तंत्र के लिए अत्यंत लाभकारी: रात के खाने के 1-2 घंटे बाद आधा से एक ग्राम हरड़ चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लेने से कब्ज, गैस और अपच में धीरे-धीरे स्थायी राहत मिलती है (डॉ. अंजू चौधरी).
  • दोष-विशिष्ट उपयोग: वात (जोड़ों का दर्द, सूखापन) के लिए देसी घी के साथ; पित्त (एसिडिटी, जलन) के लिए मिश्री या शहद के साथ; कफ (जमाव, सुस्ती) के लिए गुनगुने पानी के साथ भोजन से पहले.
  • खांसी, कफ, त्वचा समस्याओं, रक्त शुद्धि और वजन प्रबंधन में भी सहायक; रसायन के रूप में नियमित सूक्ष्म खुराक धातुओं को मजबूत कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: हरड़ आयुर्वेद की 'माँ समान' रसायन औषधि है, जो शरीर और मन को धीरे-धीरे संतुलित करती है.

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