सोमनाथ मंदिर: सदियों के हमलों के बावजूद आस्था, पहचान और पुनरुत्थान की गाथा.

जीवनशैली
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News18•10-01-2026, 13:15
सोमनाथ मंदिर: सदियों के हमलों के बावजूद आस्था, पहचान और पुनरुत्थान की गाथा.
- •प्रभास पाटन, गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर, भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से पहला और एक अत्यंत पवित्र हिंदू तीर्थस्थल है.
- •इसे महमूद गजनी (1026 ई.), अलाउद्दीन खिलजी की सेना (1299 ई.), मुजफ्फर शाह प्रथम (1395 ई.) और औरंगजेब (1706 ई.) सहित कई आक्रमणों और विनाश का सामना करना पड़ा है.
- •बार-बार विनाश के बावजूद, मंदिर का लगातार शासकों और भक्तों द्वारा पुनर्निर्माण किया गया, जिनमें चालुक्य राजा कुमारपाल, महिपाल प्रथम और भारत की स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल शामिल हैं.
- •मंदिर का अस्तित्व भक्तों की अटूट आस्था, सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक के रूप में इसकी भूमिका और इसके पुनर्निर्माण में मजबूत नेतृत्व के कारण है.
- •आज, सोमनाथ पारंपरिक शिल्प कौशल की एक उत्कृष्ट कृति के रूप में खड़ा है, जो सालाना लाखों भक्तों को आकर्षित करता है और भारत के लचीलेपन का प्रतीक है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: सोमनाथ मंदिर का सदियों के हमलों के बावजूद अस्तित्व अटूट आस्था, सांस्कृतिक पहचान और लचीलेपन का प्रतीक है.
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