छतरपुर जिले में मकर संक्रांति पर्व मिट्टी के खिलोने पूजने की परंपरा 
छतरपुर
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News1813-01-2026, 19:11

मकर संक्रांति पर छतरपुर में मिट्टी के घोड़े क्यों खरीदते हैं लोग? सूर्य देव से जुड़ी है प्रथा.

  • छतरपुर, बुंदेलखंड में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी के बजाय मिट्टी के घोड़े, चकरी और चीनी के बताशे खरीदने और पूजने की अनोखी परंपरा है.
  • यह प्राचीन परंपरा सूर्य देव के घोड़ों द्वारा विश्राम के बाद गति प्राप्त करने का प्रतीक मानी जाती है, क्योंकि मकर संक्रांति पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं.
  • यह प्रथा पूरे बुंदेलखंड में प्रचलित है और अच्छी फसल तथा सूखे से बचाव की कामना से भी जुड़ी है.
  • कुम्हार मिट्टी के घोड़े बनाते हैं, जिन्हें लोग खरीदकर घरों और आंगन में पूजते हैं, खासकर मकर संक्रांति पर, ताकि सांस्कृतिक विरासत बनी रहे.
  • पंडित रामफल शुक्ल के अनुसार, परिवार में जितने बच्चे होते हैं, उतने ही मिट्टी के घोड़े खरीदे जाते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में खपरैल वाले घरों में रखे जाते हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: छतरपुर में मकर संक्रांति पर मिट्टी के घोड़ों की पूजा की अनोखी परंपरा है, जो सूर्य देव की नई ऊर्जा का प्रतीक है.

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