सरहद पर अजान: एक पुकार, दो देश और एक ही समय इफ्तार – जानें यह दिलचस्प कहानी
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सरहद की अजान: एक आवाज, दो मुल्क और एक ही वक्त में खुलते रोजे
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News18•18-03-2026, 14:36
सरहद की अजान: एक आवाज, दो मुल्क और एक ही वक्त में खुलते रोजे
•रमजान में भारत-पाकिस्तान सीमावर्ती गांवों में एक अनोखा दृश्य देखा जाता है, जहां एक ही समय में रोजे खोले जाते हैं.
•पाकिस्तान की मस्जिदों से उठने वाली अजान की आवाज भारत के बाड़मेर के चांदे का पार, बन्ने की बस्ती और पादरिया जैसे गांवों में इफ्तार का संकेत बनती है.
•ग्रामीण इफ्तार का समय निर्धारित करने के लिए घड़ियों या मोबाइल फोन के बजाय सीमा पार से आने वाली अजान पर निर्भर करते हैं.
•दोनों देशों के मुसलमान एक ही समय पर नमाज अदा करते हैं; बन्ने की बस्ती (भारत) और मूसा की ढाणी (पाकिस्तान) के बीच केवल 3 किलोमीटर की दूरी के कारण अजान कई किलोमीटर तक सुनाई देती है.
•शरीफ खान के अनुसार, यह परंपरा वर्षों पुरानी है, जो इफ्तार के लिए एक विश्वसनीय संकेत प्रदान करती है और सीमा के बावजूद दिलों को जोड़ती है.