नागौर का 'कलरू' गांव: कला, आस्था और शिक्षा का संगम, सांस्कृतिक पहचान का गढ़

नागौर
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News18•03-02-2026, 12:17
नागौर का 'कलरू' गांव: कला, आस्था और शिक्षा का संगम, सांस्कृतिक पहचान का गढ़
- •नागौर के पास स्थित कलरू गांव कला, आस्था और शिक्षा के अनूठे संगम के लिए जाना जाता है, जो एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान बनाता है.
- •यह गांव लोक कलाकारों और साहित्यकारों का केंद्र है, जो लोक कला और संगीत की समृद्ध परंपरा को पीढ़ियों से संजोए हुए है.
- •यहां स्थित संत परसराम महाराज मंदिर और अन्य कई मंदिर इसे धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण बनाते हैं, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं.
- •कलरू प्रसिद्ध लोक गायक रामनिवास कलरू की जन्मभूमि है, जिन्होंने गांव और राजस्थानी लोक संस्कृति को प्रसिद्धि दिलाई.
- •गांव ने विधायक लक्ष्मणराम कलरू के माध्यम से राजनीतिक और शिक्षाविद् सुखवीर भादू कलरू के माध्यम से बौद्धिक योगदान भी दिया है, शिक्षा और राजस्थानी भाषा को बढ़ावा दिया है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: कलरू गांव अपनी समृद्ध विरासत के माध्यम से कला, आस्था और शिक्षा को मिलाकर एक जीवंत सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है.
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