तेलंगाना के गांवों ने त्योहार के पैसे को बनाया 'हरा सोना', दूसरों के लिए बने प्रेरणा

करीमनगर
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News18•07-02-2026, 22:19
तेलंगाना के गांवों ने त्योहार के पैसे को बनाया 'हरा सोना', दूसरों के लिए बने प्रेरणा
- •पेड्डापल्ली के दो गांवों, डोंगथुर्थी और बोटलावानापार्थी ने सम्मक्का-सारक्का जतारा के धन का उपयोग त्योहार स्थल के विकास के लिए किया.
- •उन्होंने त्योहार स्थलों पर फल के बाग (आम, अमरूद) लगाए, जो भक्तों को छाया और गांव को वार्षिक आय प्रदान करते हैं.
- •डोंगथुर्थी ने 2006 में 60,000 रुपये के अधिशेष से दो एकड़ जमीन खरीदी और एक आम का बाग लगाया, जिससे अब सालाना 1 लाख रुपये का पट्टा मिलता है.
- •बोटलावानापार्थी ने 20,000 रुपये के अधिशेष और योगदान का उपयोग करके 2.5 एकड़ में फल के पेड़ लगाए, रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से लागत कम की.
- •ये पहल जतारा प्रबंधन के लिए आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करती हैं, भक्तों को आराम प्रदान करती हैं और हरियाली को बढ़ावा देती हैं, जिससे अन्य क्षेत्रों को प्रेरणा मिलती है.
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