कुमाऊं में परियों को एडी-आंचरी के रूप में पूजते हैं लोग
नैनीताल
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News1819-12-2025, 06:31

कुमाऊं की रहस्यमयी एड़ी-आंचरी: पहाड़ों में परियों का प्राचीन विश्वास.

  • उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में, एड़ी-आंचरी के नाम से जानी जाने वाली परियों को जंगलों और पहाड़ों की संरक्षक आत्मा माना जाता है, यह विश्वास पीढ़ियों से गहरा है.
  • बच्चों की बीमारियों या डर को अक्सर एड़ी-आंचरी के प्रभाव से जोड़ा जाता है, जिसके लिए चौराहों पर नारियल चढ़ाने जैसे विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं.
  • पूजा में पुरुष (एड़ी: बांसुरी, बंदूक) और महिला (आंचरी: सफेद कपड़े, फूल) रूपों के लिए अलग-अलग चढ़ावे होते हैं, जो एकांत स्थानों पर तीन पत्थरों के 'घर' में किए जाते हैं.
  • ढोल-दमाऊं के साथ जागार, आध्यात्मिक समारोहों का केंद्र हैं, जहाँ एड़ी-आंचरी व्यक्तियों में 'अवतरित' होकर भक्तों की इच्छाएं सुनती हैं.
  • आन-बान (लाल, काले, पीले-सफेद) जैसे सेवकों की भी पूजा की जाती है, प्रत्येक का अपना अनूठा स्वभाव और चढ़ावा होता है, जो क्षेत्र के समृद्ध लोककथाओं को बढ़ाता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: कुमाऊं की एड़ी-आंचरी पहाड़ी संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन में गहराई से बुनी एक जीवंत, प्राचीन परी परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं.

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