कुमाऊं का उत्तरायणी मेला: सिर्फ उत्सव नहीं, जीवंत विरासत की पूरी कहानी.

बागेश्वर
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News18•18-12-2025, 12:00
कुमाऊं का उत्तरायणी मेला: सिर्फ उत्सव नहीं, जीवंत विरासत की पूरी कहानी.
- •उत्तरायणी सूर्य के धनु से मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक, स्नान, दान और पूजा के लिए अत्यंत शुभ समय.
- •बागेश्वर में सरयू-गोमती संगम पर लगने वाला उत्तरायणी मेला राज्य में सबसे प्रसिद्ध है, पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है.
- •कुमाऊंनी लोक संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन: छोलिया, झोड़ा-चांचरी, न्योली नृत्य और ढोल-दमाऊ संगीत की गूंज.
- •ऐतिहासिक रूप से एक प्रमुख व्यापार केंद्र, अब ग्रामीण हस्तशिल्प और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देता है.
- •युवाओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है, परंपरा और आधुनिकता का संतुलन साधकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बागेश्वर का उत्तरायणी मेला कुमाऊं की जीवंत विरासत है, जो आस्था, संस्कृति और समुदाय को जोड़ता है.
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