नैनीताल के माल रोड में स्थित है भारत का पहला मेथोडिस्ट चर्च
नैनीताल
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News1825-12-2025, 17:19

नैनीताल: झीलों का शहर ही नहीं, ऐतिहासिक चर्चों का भी गढ़!

  • उत्तराखंड का नैनीताल, झीलों के शहर के साथ-साथ लगभग 18 ऐतिहासिक चर्चों और चैपलों के कारण 'चर्चों का शहर' भी कहलाता है, जो ब्रिटिश विरासत को जीवित रखते हैं.
  • सुखाताल में 1848 में बना सेंट जॉन इन द वाइल्डरनेस चर्च कुमाऊं का पहला प्रोटेस्टेंट चर्च था, जहाँ जिम कॉर्बेट के माता-पिता की कब्रें हैं और 1880 के भूस्खलन पीड़ितों को याद किया जाता है.
  • टल्लीताल मॉल रोड पर स्थित सेंट फ्रांसिस कैथोलिक चर्च (1868) को 'लेक चर्च' भी कहते हैं; 1909 में इसका विस्तार हुआ और यह पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है.
  • भारत का पहला मेथोडिस्ट चर्च 1858 में मल्लीताल में अमेरिकी पादरी विलियम बटलर द्वारा स्थापित किया गया था, जिसे कुमाऊं कमिश्नर हेनरी रैमसे का विशेष समर्थन मिला.
  • शेरवुड कॉलेज और ऑल सेंट्स कॉलेज जैसे संस्थानों में कई निजी चैपल नैनीताल की समृद्ध ईसाई विरासत और धार्मिक विविधता को दर्शाते हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: नैनीताल अपनी ब्रिटिश विरासत के कारण ऐतिहासिक चर्चों और चैपलों का एक समृद्ध केंद्र है, जिसे 'चर्चों का शहर' भी कहा जाता है.

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