उत्तराखंड का ढोल: वह वाद्य यंत्र जिसे बजाने से प्रकट होते हैं देवता.

अल्मोड़ा
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News18•08-02-2026, 13:47
उत्तराखंड का ढोल: वह वाद्य यंत्र जिसे बजाने से प्रकट होते हैं देवता.
- •ढोल उत्तराखंड की लोक संस्कृति का अभिन्न अंग है, जो पहाड़ों की पहचान और लोगों की भावनाओं से जुड़ा है.
- •प्राचीन काल में ढोल का उपयोग गांव में महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाने के लिए किया जाता था, जिससे लोग खबर समझ जाते थे.
- •इसका धार्मिक महत्व भी है; देवी-देवताओं की पूजा, जागर, हवन और मंदिर के आयोजनों में ढोल बजाना आवश्यक माना जाता है.
- •शादियों, शुभ अवसरों और छोलिया नृत्य, झोड़ा जैसे लोक नृत्यों में ढोल का विशेष स्थान है, जो उत्सवों में नई ऊर्जा भरता है.
- •अल्मोड़ा के एक विक्रेता के अनुसार, ढोल की कीमत लगभग 7000 से शुरू होती है, लेकिन उन्हें चिंता है कि लोग अपनी विरासत भूल रहे हैं.
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