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100 के बजाय 101 रुपये ही क्यों दिए जाते हैं? सदियों पुरानी इस परंपरा का रहस्य जानें
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100 नहीं, 101 रुपये ही क्यों? भारत की सदियों पुरानी शुभ परंपरा का राज.
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News18
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10-03-2026, 13:34
100 नहीं, 101 रुपये ही क्यों? भारत की सदियों पुरानी शुभ परंपरा का राज.
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भारत में शादी, त्योहार या शुभ अवसरों पर लिफाफे में पैसे देने की पुरानी परंपरा है.
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अक्सर 100, 500 या 1000 की जगह 101, 501 या 1001 रुपये दिए जाते हैं, जिसमें एक रुपये का सिक्का शामिल होता है.
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गोल संख्याएं अंत का प्रतीक मानी जाती हैं, जबकि एक रुपया जोड़ना प्रगति, वृद्धि और निरंतरता दर्शाता है.
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यह परंपरा ईश्वर के आशीर्वाद, सकारात्मक ऊर्जा और अविभाज्य धन का प्रतीक भी मानी जाती है.
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यह केवल पैसे नहीं, बल्कि प्राप्तकर्ता के लिए निरंतर सुख और समृद्धि की हार्दिक शुभकामनाएं हैं, जो आज भी प्रचलित है.
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