2026 के बाद गंगा जल: भारत-बांग्लादेश के लिए सबसे कठिन फैसला.
भारत
C
CNBC Awaaz06-01-2026, 13:00

2026 के बाद गंगा जल: भारत-बांग्लादेश के लिए सबसे कठिन फैसला.

  • 1996 में हस्ताक्षरित भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है, जिससे एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है.
  • 1996 की संधि में फरक्का बैराज पर जल बंटवारे का प्रावधान है, जिसमें शुष्क महीनों के दौरान 75,000 क्यूसेक से अधिक और 70,000 क्यूसेक से कम प्रवाह के लिए विशिष्ट नियम हैं.
  • गंगा बेसिन गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है, जिससे भारत में प्रति व्यक्ति उपलब्धता प्रभावित हो रही है और बांग्लादेश में पद्मा नदी का जलस्तर गिर रहा है, जिसके कारण ढाका फरवरी-मई में गारंटीकृत प्रवाह की मांग कर रहा है.
  • राजनीतिक जटिलताओं में ढाका में सरकार परिवर्तन, दिल्ली-ढाका तनाव में वृद्धि और पश्चिम बंगाल की महत्वपूर्ण भूमिका शामिल है, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता बंदरगाह की नौगम्यता के कारण राज्य की सहमति पर जोर दे रही हैं.
  • बातचीत शुरू हो गई है; भारत अपनी विकासात्मक आवश्यकताओं को शामिल करना चाहता है और जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर लचीलेपन के लिए 10-15 साल की छोटी संधि अवधि का प्रस्ताव कर रहा है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारत और बांग्लादेश को 2026 तक गंगा जल संधि को नवीनीकृत करने के लिए जटिल चुनौतियों का सामना करना होगा.

More like this

Loading more articles...