माघी गणपति: क्यों कहलाती है 'तिलकुंद' गणेश चतुर्थी? जानें 6 अद्भुत फायदे!

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News18•21-01-2026, 14:48
माघी गणपति: क्यों कहलाती है 'तिलकुंद' गणेश चतुर्थी? जानें 6 अद्भुत फायदे!
- •माघी गणेश जयंती, जिसे 'तिलकुंद चतुर्थी' भी कहते हैं, महाराष्ट्र में बड़े उत्साह से मनाई जाती है, यह भगवान गणेश के 'महोत्कट विनायक' अवतार का दिन है.
- •'तिलकुंद' नाम तिल के लड्डू चढ़ाने, तिल मिले पानी से स्नान करने और माघ में खिलने वाले सफेद 'कुंद' फूलों से गणेश पूजा करने के कारण पड़ा है.
- •इस दिन पूजा करने से साल भर की 24 चतुर्थियों के बराबर पुण्य मिलता है, बाधाएं दूर होती हैं और रुके हुए काम पूरे होते हैं.
- •छात्रों को शैक्षणिक सफलता और बौद्धिक विकास मिलता है, जबकि तिल का सेवन और दान स्वास्थ्य और लंबी उम्र को बढ़ावा देता है.
- •गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करने से आर्थिक स्थिति सुधरती है, और माघी गणपति की कथा सुनने से मानसिक शांति व पारिवारिक सौहार्द आता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: माघी गणपति या तिलकुंद चतुर्थी विशिष्ट अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक और भौतिक लाभ प्रदान करती है.
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