महाशिवरात्रि 2026: शिव-पार्वती विवाह नहीं, इस रहस्यमय कारण से मनाते हैं यह पर्व

धर्म
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Moneycontrol•22-01-2026, 14:39
महाशिवरात्रि 2026: शिव-पार्वती विवाह नहीं, इस रहस्यमय कारण से मनाते हैं यह पर्व
- •महाशिवरात्रि 2026 का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा, क्योंकि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी 15 फरवरी को शाम 5:04 बजे शुरू होकर 16 फरवरी को शाम 5:34 बजे समाप्त होगी.
- •दुनिया भर के शिव भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए प्रदोष काल और निशिता काल में विशेष पूजा करते हैं.
- •लोकप्रिय धारणा के विपरीत, महाशिवरात्रि मुख्य रूप से शिव-पार्वती के विवाह के लिए नहीं, बल्कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी पर भगवान शिव के दिव्य लिंग के रूप में पहली बार प्रकट होने के लिए मनाई जाती है.
- •शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव इस दिन एक ऐसे लिंग के रूप में प्रकट हुए थे जिसका न आदि था न अंत, जिससे ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु के बीच श्रेष्ठता का प्रश्न हल हुआ.
- •ज्योतिषी डॉ. मृत्युंजय तिवारी स्पष्ट करते हैं कि शिव का सती से विवाह चैत्र कृष्ण त्रयोदशी को और पार्वती से विवाह मार्गशीर्ष कृष्ण द्वितीया को हुआ था, जैसा कि रुद्र संहिता में वर्णित है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: महाशिवरात्रि 2026 भगवान शिव के दिव्य लिंग रूप में प्रकट होने का उत्सव है, न कि उनके विवाह का.
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