The 38-year-old explained that in Britain, work is just one part of life. (Photo Credit: X)
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News1820-01-2026, 13:17

भारतीय टेक कर्मचारी यूके में काम-जीवन संतुलन की सराहना करती है: 'स्वास्थ्य, परिवार पर ध्यान'

  • कंसल्टिंग प्रिंसिपल मोधुरा रॉय ने भारत से यूके जाने के बाद काम की संस्कृति में बड़ा बदलाव देखा है.
  • भारत में सात साल बिताने के बाद, उन्होंने पाया कि यूके की कंपनियाँ लगातार उपलब्धता और लंबे घंटों के बजाय कर्मचारी कल्याण, अवकाश और परिवार के समय को प्राथमिकता देती हैं.
  • रॉय ने बताया कि यूके में काम को जीवन का एक हिस्सा माना जाता है, न कि हर जागने वाले घंटे को खपत करने वाला. यहाँ गुणवत्तापूर्ण काम और व्यक्तिगत कौशल विकास पर जोर दिया जाता है.
  • उन्होंने इसकी तुलना भारत की 'अत्यधिक उत्पादकता' संस्कृति से की, जहाँ मानसिक स्वास्थ्य को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है और कर्मचारियों पर राजस्व सृजन का दबाव होता है.
  • मार्च 2020 में लंदन जाने से उन्हें एक माँ के रूप में अपने करियर और व्यक्तिगत जीवन को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिली, हालाँकि उन्हें महंगे चाइल्डकैअर जैसी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: एक भारतीय टेक कर्मचारी यूके में बेहतर काम-जीवन संतुलन पाती है, जहाँ कल्याण को अत्यधिक उत्पादकता से अधिक प्राथमिकता दी जाती है.

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