मलाना का 'नो-टच' रिवाज विवादों में: परंपरा या भेदभाव?

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News18•06-01-2026, 11:33
मलाना का 'नो-टच' रिवाज विवादों में: परंपरा या भेदभाव?
- •तुलिका अग्रवाल के वायरल वीडियो ने मलाना गांव के 'नो-टच' रिवाज को उजागर किया, जिसमें बाहरी लोगों से पैसे जमीन पर रखकर लिए जाते हैं.
- •मलाना के लोग मानते हैं कि बाहरी लोगों का स्पर्श अनुष्ठानिक शुद्धता को भंग करता है, वे अपनी पहचान और सदियों पुरानी परंपरा को बनाए रखते हैं.
- •यह रिवाज, देवता जम्लू से जुड़ा है, बाहरी लोगों को ग्रामीणों, घरों या मंदिरों को छूने से रोकता है; उल्लंघन पर जुर्माना या शुद्धिकरण हो सकता है.
- •वीडियो ने बहस छेड़ दी: आलोचक इसे भेदभाव और अस्पृश्यता कहते हैं, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 17 का हवाला देते हुए जो ऐसी प्रथाओं को समाप्त करता है.
- •समर्थक इसे पवित्र परंपरा बताते हैं, न कि घृणा, और कहते हैं कि आगंतुकों को स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान करना चाहिए, जबकि आलोचक पाखंड पर सवाल उठाते हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मलाना का 'नो-टच' रिवाज परंपरा, भेदभाव और संवैधानिक अधिकारों पर बहस छेड़ता है.
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