At its heart, the film is about two friends.(Photo Credit: Instagram)
ओपिनियन
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News1817-12-2025, 15:40

"होमबाउंड" ऑस्कर एंट्री: भारत के भेदभाव और प्रवासी संकट की मार्मिक कहानी.

  • भारत की ऑस्कर एंट्री "होमबाउंड" व्यवस्थित क्रूरता और हाशिए पर पड़े समुदायों द्वारा सामना किए जाने वाले भेदभाव को सूक्ष्मता से दर्शाती है.
  • फिल्म दलित चंदन और मुस्लिम शोएब नामक दो दोस्तों की कहानी बताती है, जिनके जीवन को कोविड-19 से पहले भी जाति और धर्म ने आकार दिया था.
  • यह दर्शाती है कि भेदभाव केवल हिंसा के रूप में नहीं, बल्कि कागजी कार्रवाई, चुप्पी और बंद दरवाजों के माध्यम से कैसे प्रकट होता है, जिससे सरकारी नौकरी के उनके सपने प्रभावित होते हैं.
  • कोविड-19 लॉकडाउन ने उनकी आजीविका छीन ली, उन्हें प्रवासी संकट में धकेल दिया, जिसमें एक दोस्त बुनियादी मदद की कमी के कारण दुखद रूप से मर जाता है.
  • "होमबाउंड" उपदेश नहीं देती, बल्कि पुरानी बेरोजगारी, अदृश्य प्रवासी श्रम और जाति/धर्म कैसे मदद तक पहुंच तय करते हैं, इसकी मानवीय कीमत को धीरे से उजागर करती है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: "होमबाउंड" व्यवस्थित भेदभाव और सामाजिक उदासीनता की मानवीय कीमत को उजागर करने वाली एक शक्तिशाली फिल्म है.

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