The Tibetan plateau spans approximately 2.5 million square kilometers with an average height of over 4,500 meters, touching the borders of India, Pakistan, Nepal, Bhutan, and China.
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News1802-02-2026, 15:07

तिब्बती पठार की 'प्रवाहित' परत ने टेक्टोनिक सिद्धांत को चुनौती दी, भूकंप के जोखिम का खुलासा किया

  • नए उपग्रह अनुसंधान से पता चला है कि तिब्बती पठार की परत कठोर चट्टान की तरह नहीं, बल्कि धीरे-धीरे बहने वाले तरल की तरह व्यवहार करती है, जो पारंपरिक टेक्टोनिक सिद्धांतों को चुनौती देती है.
  • तिब्बत का पूर्वी भाग 25 मिमी/वर्ष की गति से पूर्व की ओर बढ़ रहा है, जबकि अन्य क्षेत्र 10 मिमी/वर्ष की गति से बढ़ रहे हैं, जो आंतरिक खिंचाव और दबाव का संकेत देता है.
  • कुनलुन फॉल्ट अपेक्षा से कमजोर है, जिससे पठार का आंतरिक भाग पूर्व की ओर बहता है और भारतीय-यूरेशियन प्लेट टक्कर से ऊर्जा छोड़ता है.
  • ऊर्ध्वाधर भूमि विस्थापन (5 मिमी डूबना/उठना) 2.5 मिलियन वर्ग किमी पठार में संभावित भविष्य के भूकंप क्षेत्रों का सुझाव देता है.
  • 44,000 रडार छवियों और 14,000 GNSS मापों के एक अभूतपूर्व डेटासेट ने मिलीमीटर-सटीक मानचित्रण को सक्षम किया, जो भूकंप जोखिम मॉडल में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: तिब्बती पठार की अप्रत्याशित 'प्रवाहित' परत टेक्टोनिक समझ को फिर से परिभाषित करती है और नए भूकंप जोखिमों को उजागर करती है.

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