आर्थिक सर्वेक्षण: प्रतिबंध के बावजूद मैला ढोना जारी, जातिगत कलंक गहरा

भारत
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CNBC TV18•29-01-2026, 23:31
आर्थिक सर्वेक्षण: प्रतिबंध के बावजूद मैला ढोना जारी, जातिगत कलंक गहरा
- •आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने मैला ढोने की प्रथा के जारी रहने पर चिंता जताई है, इसे गहरे सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों और जाति-आधारित कलंक से जोड़ा है.
- •अधिकांश सीवर और सेप्टिक टैंक कार्यकर्ता (SSWs) विशिष्ट जातियों (वाल्मीकि, मेहतर, डोम, मदिगा, माला) से संबंधित हैं, जो ऐतिहासिक भेदभाव का सामना कर रहे हैं.
- •मैला ढोने वालों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013, और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश मौजूद हैं, लेकिन प्रवर्तन कमजोर बना हुआ है.
- •नमस्ते योजना (जुलाई 2023) का उद्देश्य श्रमिकों का पुनर्वास करना है, जिसमें 89,104 SSWs को मान्य किया गया है; सर्वेक्षण आधारभूत डेटा के लिए 'स्वच्छ सर्वेक्षण' का उपयोग करने का सुझाव देता है.
- •सिफारिशों में शहरी स्थानीय निकायों को जवाबदेह ठहराना, स्वदेशी मशीनीकृत सफाई उपकरणों को बढ़ाना और व्यापक पुनर्वास प्रयास शामिल हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: जातिगत कलंक और कमजोर प्रवर्तन के कारण मैला ढोना जारी है, जिसके लिए सामाजिक परिवर्तन और मजबूत पुनर्वास की आवश्यकता है.
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