सुप्रीम कोर्ट ने ECI की 'असीमित शक्तियों' पर सवाल उठाए, 'बेलगाम घोड़े' जैसा व्यवहार न करने की चेतावनी दी.

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News18•22-01-2026, 06:40
सुप्रीम कोर्ट ने ECI की 'असीमित शक्तियों' पर सवाल उठाए, 'बेलगाम घोड़े' जैसा व्यवहार न करने की चेतावनी दी.
- •सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की 'असीमित शक्तियों' पर सवाल उठाए.
- •सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची सहित पीठ ने जोर दिया कि ECI के कार्य 'न्यायपूर्ण और निष्पक्ष' होने चाहिए और मतदाताओं के नागरिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकते.
- •ECI ने तर्क दिया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) उसे 'तार्किक विसंगतियों' और 'फर्जी प्रविष्टियों' को हटाने के लिए मानक प्रक्रियाओं से हटने की अनुमति देती है.
- •अदालत ने पारदर्शिता की कमी पर चिंता व्यक्त की, विशेष रूप से छह मानक सत्यापन दस्तावेजों को 11 नए दस्तावेजों से बदलने पर, जिससे ग्रामीण/गरीब मतदाता वंचित हो सकते हैं.
- •पश्चिम बंगाल में, 1.36 करोड़ मतदाताओं को विसंगतियों के लिए चिह्नित किया गया; आलोचकों का आरोप है कि SIR का उपयोग 'प्रोफाइलिंग' के लिए किया जा रहा है, जिससे जनता में 'तनाव' बढ़ रहा है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: सुप्रीम कोर्ट ECI की मतदाता सूची संशोधन की शक्ति की जांच कर रहा है, पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर दे रहा है.
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