सुप्रीम कोर्ट: विवाहित महिला सहमति से बने संबंध को झूठे विवाह के वादे पर बलात्कार नहीं कह सकती

भारत
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News18•06-02-2026, 07:42
सुप्रीम कोर्ट: विवाहित महिला सहमति से बने संबंध को झूठे विवाह के वादे पर बलात्कार नहीं कह सकती
- •सुप्रीम कोर्ट ने एक बलात्कार के मामले को रद्द कर दिया, यह फैसला सुनाते हुए कि सहमति से बना संबंध खराब होने पर झूठे विवाह के वादे के आधार पर बलात्कार का आपराधिक अपराध नहीं है.
- •न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और उज्ज्वल भुइयां ने जोर दिया कि विवाद व्यक्तिगत था और राज्य को निजी संघर्षों में शामिल नहीं होना चाहिए.
- •यह मामला बिलासपुर जिले में फरवरी 2025 की प्राथमिकी से उत्पन्न हुआ था, जिसमें छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पहले कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया था.
- •शिकायतकर्ता, एक 33 वर्षीय विवाहित महिला और वकील, को कानूनी निहितार्थों के बारे में जागरूक माना गया, क्योंकि उसका तलाक लंबित था, जिससे दूसरी शादी अवैध हो जाती.
- •अदालत ने प्राथमिकी और सभी संबंधित कार्यवाही को रद्द कर दिया, यह कहते हुए कि आईपीसी की धारा 376(2)(एन) के तहत अपराध नहीं बनता है, और टूटे हुए रिश्तों को आपराधिक शिकायतों में बदलने की प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला.
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