श्रद्धा के नाम पर नरभक्षण: फोर जनजाति की मृत रिश्तेदारों को खाने की चौंकाने वाली प्रथा

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News18•27-01-2026, 21:05
श्रद्धा के नाम पर नरभक्षण: फोर जनजाति की मृत रिश्तेदारों को खाने की चौंकाने वाली प्रथा
- •पापुआ न्यू गिनी की फोर जनजाति 'एंडोकैनिबेलिज्म' का अभ्यास करती थी, जिसमें मृत रिश्तेदारों का मांस प्रेम और सम्मान के प्रतीक के रूप में खाया जाता था, यह मानते हुए कि इससे उनकी आत्मा जीवित रहती है.
- •मुख्य रूप से महिलाएं इस अनुष्ठान को करती थीं, जिसमें मृत व्यक्ति के अंगों, विशेषकर मस्तिष्क को पकाकर खाया जाता था.
- •1950 के दशक में, 'कुरु' नामक एक घातक न्यूरोलॉजिकल बीमारी (जिसे 'लाफिंग डेथ' भी कहा जाता है) जनजाति में तेजी से फैल गई, खासकर महिलाओं को प्रभावित किया.
- •कुरु के कारण गंभीर कंपन, अनियंत्रित हंसी और संतुलन का नुकसान होता था, अंततः मृत्यु हो जाती थी, और यह संक्रमित मस्तिष्क के सेवन से जुड़ा था.
- •यह प्रथा 1960 के आसपास बंद कर दी गई थी, और कुरु महामारी को आधिकारिक तौर पर 2012 में समाप्त घोषित कर दिया गया था, हालांकि इसके रोगजनक दशकों तक निष्क्रिय रह सकते हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: फोर जनजाति का अनुष्ठानिक नरभक्षण, जिसे श्रद्धा के रूप में माना जाता था, एक विनाशकारी कुरु महामारी का कारण बना.
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