नहीं कहने की शक्ति: कैसे 'नहीं' कहने से बेहतर 'हाँ' के लिए जगह बनती है.

जीवनशैली
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Moneycontrol•08-02-2026, 09:08
नहीं कहने की शक्ति: कैसे 'नहीं' कहने से बेहतर 'हाँ' के लिए जगह बनती है.
- •कई लोग दूसरों को निराश करने, रिश्तों को नुकसान पहुँचाने या असहयोगी दिखने के डर से 'नहीं' कहने में संघर्ष करते हैं.
- •यह आदत अक्सर बचपन की कंडीशनिंग से आती है जहाँ सहमति को पुरस्कृत किया जाता था, जो वयस्क पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में भी बनी रहती है.
- •लगातार 'हाँ' कहने से बर्नआउट, बिखरा हुआ ध्यान, नाराजगी और यह भावना पैदा होती है कि व्यक्तिगत प्राथमिकताएँ मायने नहीं रखतीं.
- •'नहीं' कहना सीखने से व्यक्ति के समय, ऊर्जा और आंतरिक दुनिया की रक्षा होती है, जिससे प्रामाणिक जुड़ाव और आत्म-सम्मान के लिए जगह बनती है.
- •ईमानदार सीमाएँ, हालांकि शुरू में मुश्किल होती हैं, अंततः रिश्तों को मजबूत करती हैं और अधिक सार्थक प्रतिबद्धताओं के लिए जगह बनाती हैं.
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