अश्वगंधा  
कृषि
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News1826-01-2026, 06:39

नागौरी अश्वगंधा: सूखे इलाकों के किसानों के लिए वरदान, कम पानी में लाखों की कमाई

  • नागौरी अश्वगंधा को हाल ही में GI टैग मिला है, जिससे राजस्थान के नागौर जिले में कृषि में क्रांति आ रही है और सूखे क्षेत्रों में उच्च लाभ मिल रहा है.
  • अपने औषधीय गुणों और विशिष्ट मोटी जड़ों के लिए जानी जाने वाली यह फसल शुष्क, गर्म जलवायु और 7.5-8.0 पीएच वाली हल्की रेतीली-दोमट मिट्टी में पनपती है.
  • खेती के लिए न्यूनतम पानी (1-2 सिंचाई) की आवश्यकता होती है, जो इसे पानी की कमी वाले क्षेत्रों के लिए आदर्श बनाती है; अत्यधिक पानी जड़ों को सड़ा सकता है.
  • सितंबर-अक्टूबर में बुवाई, प्रति हेक्टेयर 4-5 किलोग्राम बीज और न्यूनतम उर्वरक (15 किलोग्राम नाइट्रोजन/पोटाश) के साथ लागत कम रहती है.
  • किसान प्रति हेक्टेयर 5-6 क्विंटल सूखी जड़ों से 3-4 लाख रुपये कमा सकते हैं, जबकि खेती की लागत केवल 15-20 हजार रुपये है, आयुर्वेदिक कंपनियों से उच्च मांग के कारण.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: नागौरी अश्वगंधा सूखे क्षेत्रों के किसानों के लिए कम पानी और कम लागत में महत्वपूर्ण आय का स्रोत है.

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